नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने NEET परीक्षा पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों को बड़ी राहत दी है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने छात्र हित और उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए 20 से 25 जुलाई 2026 के बीच छात्र प्रदर्शन से जुड़े सभी FIR रद्द करने का आदेश दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ दर्ज इन मामलों में अब आगे जांच या कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
छात्रों के खिलाफ सभी FIR होंगी रद्द
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को मामले में फैसला सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह फैसला उन छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिन्होंने पूरी ईमानदारी और अच्छी नीयत के साथ छात्र आंदोलन में हिस्सा लिया था। कोर्ट के आदेश के बाद प्रदर्शन से जुड़े छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
करीब एक महीने तक जंतर-मंतर पर हुआ था प्रदर्शन
NEET परीक्षा पेपर लीक के विरोध में छात्रों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर करीब एक महीने तक प्रदर्शन किया था। इस दौरान प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ अलग-अलग जगहों पर FIR दर्ज की गई थीं।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद इन मामलों में छात्रों को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने संबंधित मामलों को खत्म करने का भी आदेश दिया है।
CJP ने बताया छात्रों की बड़ी जीत
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने संविधान की तस्वीर साझा करते हुए कैप्शन में ‘जय हिंद’ लिखा और तिरंगे की इमोजी लगाई।
वहीं, CJP ने अपने आधिकारिक X हैंडल से पोस्ट कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को छात्रों की बड़ी जीत बताया। पार्टी ने कहा कि छात्रों के खिलाफ चल रहे अन्यायपूर्ण मुकदमे खारिज कर दिए गए हैं और उनकी मांगें सुनी गई हैं।
CJP ने अपनी पोस्ट में लिखा, “सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ चल रहे सभी अन्यायपूर्ण मुकदमों को खारिज कर दिया है। हमारी मांगें सुनी गई हैं और अब किसी भी छात्र को आगे ऐसी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। इंकलाब जिंदाबाद!”
आपराधिक प्रवृत्ति वाले 2,873 लोगों पर अलग कार्रवाई
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश में आपराधिक प्रवृत्ति वाले लोगों को अलग रखा गया है। अदालत के मुताबिक ऐसे 2,873 लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज की जाएगी।
इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण तरीके से छात्र आंदोलन में शामिल रहे छात्रों को राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म करने का आदेश दिया है, जबकि आपराधिक प्रवृत्ति वाले लोगों के खिलाफ अलग से कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुला रखा है।
