मुंबई: फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाना किसी भी कलाकार के लिए आसान नहीं होता। कई सितारों ने पर्दे पर चमकने से पहले जिंदगी में लंबा संघर्ष किया है। तमिल सिनेमा के अभिनेता सूरी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आज वह बतौर लीड एक्टर अपनी पहचान बना चुके हैं, लेकिन एक समय ऐसा था जब वह महज 20 रुपये की रोजाना दिहाड़ी पर काम किया करते थे।
सूरी ने फिल्मों में आने के बाद भी कई साल तक छोटे और सपोर्टिंग रोल किए। इस दौरान उन्होंने आर्थिक तंगी के साथ-साथ मुश्किल हालात और कथित अपमान का भी सामना किया। हालांकि, लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।
कभी 20 रुपये रोज की थी कमाई
साल 1993 में सूरी तिरुपुर में अपने दोस्तों के साथ छोटे-मोटे काम किया करते थे। उस समय उनकी रोज की कमाई सिर्फ 20 रुपये थी। यानी एक हफ्ते में उन्हें करीब 140 रुपये मिलते थे, जिनमें से 70 रुपये वह अपने घर भेज दिया करते थे।
हालात इतने मुश्किल थे कि वह 1.25 रुपये का नारियल बन तक नहीं खरीद पाते थे। कई बार उन्हें सिर्फ चाय पीकर गुजारा करना पड़ता था। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को छोड़ने के बजाय लगातार मेहनत जारी रखी।
रजनीकांत के फैन थे, उन्हीं से मिला ‘सूरी’ नाम
सूरी का असली नाम रामलक्ष्मणन मुथुचामी थेवर है। वह सुपरस्टार रजनीकांत के बहुत बड़े प्रशंसक रहे हैं।
रजनीकांत की साल 1991 में आई मणिरत्नम की फिल्म ‘थलपति’ से वह काफी प्रभावित हुए थे। फिल्म के किरदार से प्रेरित होकर उन्होंने अपना नाम ‘सूरी’ रख लिया। आगे चलकर इसी नाम से उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में पहचान मिली।
फिल्मों से पहले दीवारों पर करते थे पेंटिंग
फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने के बाद भी सूरी की मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। उन्होंने लंबे समय तक छोटे और बिना क्रेडिट वाले किरदार निभाए। फिल्मों में आने से पहले वह दीवारों पर पेंटिंग का काम भी किया करते थे।
गीतकार पा विजय ने एक कार्यक्रम के दौरान सूरी के संघर्ष को याद करते हुए बताया था कि कभी वह रस्सी के सहारे दीवारों पर पेंट किया करते थे और आज वही सिनेमा उन्हें ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है।
‘वेन्निला कबड्डी कुझु’ ने बदली किस्मत
सूरी करीब 1998 से फिल्म इंडस्ट्री में काम कर रहे थे, लेकिन उन्हें असली पहचान हासिल करने में कई साल लग गए। शुरुआत में उन्होंने छोटे और सपोर्टिंग रोल किए।
साल 2009 में आई फिल्म ‘वेन्निला कबड्डी कुझु’ उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। फिल्म में उनके ‘परोट्टा’ वाले सीन काफी लोकप्रिय हुए और उनके कॉमिक अंदाज को दर्शकों ने खूब पसंद किया।
इसके बाद वह इंडस्ट्री में ‘परोट्टा सूरी’ के नाम से मशहूर हो गए।
सेट पर भी झेलना पड़ा अपमान
सूरी के संघर्ष में आर्थिक परेशानियों के अलावा सेट पर कथित तौर पर अपमान के अनुभव भी शामिल रहे हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि एक बड़े कॉमेडियन और सुपरस्टार के साथ शूटिंग के दौरान उनसे अचानक शर्ट उतारने के लिए कहा गया।
उनके मुताबिक, उनकी शर्ट कॉस्ट्यूम वैन में फेंक दी गई और वह कमर पर सिर्फ तौलिया लपेटकर सेट पर खड़े रह गए। इसी दौरान उनके किरदार की जगह किसी दूसरे कलाकार के साथ सीन शूट कर लिया गया।
‘विदुथलाई’ ने कॉमेडियन से बनाया लीड एक्टर
सूरी के करियर में सबसे बड़ा बदलाव साल 2023 में ‘विदुथलाई: पार्ट 1’ से आया। निर्देशक वेत्रिमारन ने उन्हें फिल्म में कॉन्स्टेबल कुमारेशन का लीड रोल दिया।
अब तक ज्यादातर कॉमेडी और सपोर्टिंग किरदारों में नजर आए सूरी ने इस फिल्म में अपनी एक्टिंग का बिल्कुल अलग अंदाज दिखाया। उनके अभिनय को दर्शकों के साथ-साथ क्रिटिक्स की भी खूब सराहना मिली।
बतौर लीड एक्टर ‘विदुथलाई: पार्ट 1’ ने दुनियाभर में करीब 53 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। इसके बाद ‘विदुथलाई: पार्ट 2’ में भी उन्होंने कुमारेशन का किरदार निभाया, जिसने करीब 55 करोड़ रुपये की कमाई की।
‘गरुड़न’ और ‘मामन’ से भी मिली सफलता
‘विदुथलाई’ के बाद सूरी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उपलब्ध रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी फिल्म ‘गरुड़न’ ने करीब 59.50 करोड़ रुपये का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया, जबकि ‘मामन’ ने लगभग 50.75 करोड़ रुपये कमाए।
आज वही सूरी, जो कभी 20 रुपये की दिहाड़ी के लिए काम करते थे और कई बार एक साधारण नारियल बन तक नहीं खरीद पाते थे, तमिल सिनेमा में लीड एक्टर के तौर पर अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।
रजनीकांत के फैन के तौर पर शुरू हुआ उनका सफर आज उन्हें खुद एक जाना-पहचाना नाम बना चुका है। उनकी कहानी इस बात की मिसाल है कि लंबे संघर्ष और लगातार मेहनत के बाद भी सफलता हासिल की जा सकती है।
