नई दिल्ली: एसेसमेंट ईयर 2026-27 (वित्त वर्ष 2025-26) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026है। ऐसे में टैक्सपेयर्स के पास अब अपना रिटर्न दाखिल करने के लिए केवल 9 दिन का समय बचा है। समयसीमा चूकने पर जुर्माना, रिफंड में देरी और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
इनकम टैक्स विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर 14 करोड़ से अधिक टैक्सपेयर्स पंजीकृत हैं। 21 जुलाई तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 3.15 करोड़ लोग अपना ITR दाखिल कर चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स को अभी रिटर्न भरना बाकी है।
टैक्स रिफंड के लिए बैंक अकाउंट वैलिडेट करना जरूरी
यदि आप टैक्स रिफंड के पात्र हैं, तो आपका बैंक अकाउंट इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर वैलिडेट होना चाहिए। यदि आपके प्राथमिक बैंक खाते में किसी कारणवश समस्या आती है, तो विभाग वैलिडेट किए गए दूसरे बैंक खाते में रिफंड भेज सकता है।
अगर बैंक अकाउंट की जानकारी सही नहीं है या वैलिडेशन पूरा नहीं किया गया है, तो आपका रिफंड अटक सकता है।
31 जुलाई के बाद क्या होगा?
यदि आप 31 जुलाई तक ITR दाखिल नहीं कर पाते हैं, तो भी आयकर अधिनियम की धारा 139(4) के तहत बिलेटेड रिटर्न दाखिल किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए लेट फीस देनी होगी।
- सालाना आय 5 लाख रुपये से अधिक: ₹5,000 तक लेट फीस।
- सालाना आय 5 लाख रुपये या उससे कम: ₹1,000 लेट फीस।
पुराने कानून के तहत ही भरना होगा ITR
हालांकि नया आयकर अधिनियम 2025 लागू हो चुका है, लेकिन एसेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR अभी भी आयकर अधिनियम, 1961के तहत ही दाखिल किया जाएगा।
ऐसा इसलिए क्योंकि यह रिटर्न 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच हुई आय के लिए दाखिल किया जा रहा है, जिस पर पुराने कानून के प्रावधान लागू होते हैं।
वहीं, 1 अप्रैल 2026 से लागू नया आयकर कानून चालू वित्त वर्ष 2026-27 की आय पर लागू होगा। इसका असर जुलाई 2027 में दाखिल किए जाने वाले ITR पर देखने को मिलेगा।
