नई दिल्ली: पूर्व जूनियर नेशनल रेसलिंग चैंपियन सागर धनखड़ हत्याकांड में ओलंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने सुशील कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार की अदालत ने जमानत याचिका पर फैसला सुनाते हुए अपराध की गंभीरता, सुशील कुमार के प्रभाव और गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका समेत कई पहलुओं को ध्यान में रखा।
कोर्ट ने जमानत देने से क्यों किया इनकार?
अदालत ने कहा कि सामान्य तौर पर जमानत नियम और जेल अपवाद है, लेकिन इस मामले में अपराध की प्रकृति और उपलब्ध सबूतों को देखते हुए सुशील कुमार को जमानत देना उचित नहीं है।
कोर्ट के मुताबिक, प्रथम दृष्टया यह मामला पहले से सोचे-समझे अपराध और बेरहमी से किए गए हमले की ओर इशारा करता है, जिसके परिणामस्वरूप सागर धनखड़ की मौत हुई। अदालत ने हथियार की बरामदगी, वीडियो सबूत और अन्य ऐसे साक्ष्यों का भी उल्लेख किया, जिनकी मुकदमे के दौरान अभी जांच होनी बाकी है।
गवाहों को प्रभावित करने की आशंका
दिल्ली पुलिस और सागर धनखड़ के पिता ने सुशील कुमार की जमानत याचिका का विरोध किया था। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की पिछली टिप्पणी का भी हवाला दिया, जिसमें सुशील कुमार के समाज में प्रभाव और गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका को लेकर चिंता जताई गई थी।
अदालत ने कहा कि जब भी सुशील कुमार को कुछ समय के लिए रिहाई मिली, तब गवाहों के मुकरने की स्थिति सामने आई। याचिकाकर्ता ऐसा कोई ठोस आधार नहीं बता पाया जिससे यह साबित हो सके कि परिस्थितियों में कोई महत्वपूर्ण बदलाव आया है।
2021 में हुई थी गिरफ्तारी
सुशील कुमार को मई 2021 में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 19 जुलाई 2023 को सत्र अदालत ने उन्हें घुटने की सर्जरी के लिए एक सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी।
बाद में हाईकोर्ट ने 4 मार्च 2025 को उन्हें जमानत दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 13 अगस्त 2025 को हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द करते हुए सुशील कुमार की जमानत खत्म कर दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने उस समय गवाहों पर सुशील कुमार के प्रभाव और मुकदमे की कार्यवाही में देरी की संभावनाओं को लेकर चिंता जताई थी।
अब दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इन्हीं परिस्थितियों और मामले की गंभीरता को देखते हुए सुशील कुमार की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है।
