बिजनौर: उत्तर प्रदेश की बिजनौर विधानसभा सीट (सीट संख्या-22) जिला मुख्यालय की सीट है। यहां शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के मतदाता चुनावी समीकरण को प्रभावित करते हैं। मुस्लिम मतदाताओं के बाद जाट मतदाता सबसे बड़ी संख्या में हैं, इसलिए इस सीट को जाट बहुल सीटों में भी गिना जाता है।
2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की सुचि मौसम चौधरी ने बेहद करीबी मुकाबले में जीत दर्ज की थी। उन्होंने सपा गठबंधन के तहत आरएलडी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे नीरज चौधरी को 1,445 वोटों से हराया था।
2026 SIR के बाद 52 हजार से ज्यादा वोट घटे
2026 में SIR के बाद बिजनौर विधानसभा सीट पर 3,42,955 मतदाता बचे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान इस सीट पर कुल 3,95,082 मतदाता थे। यानी SIR के बाद मतदाताओं की संख्या में 52,127 की कमी आई है।
बिजनौर जिले में सबसे ज्यादा मतदाता इसी शहरी विधानसभा सीट पर कम हुए हैं। आने वाले चुनाव में मतदाता सूची में हुए इस बदलाव का राजनीतिक समीकरण पर असर देखने को मिल सकता है।
2022 में बीजेपी और RLD के बीच कांटे की टक्कर
2017 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने बिजनौर सीट पर जीत दर्ज की थी। 2022 में बीजेपी की सुचि मौसम चौधरी को 97,165 वोट मिले, जबकि सपा-आरएलडी गठबंधन के नीरज चौधरी को 95,720 वोट मिले।
वहीं BSP की रूचिवीरा को 52,035 और AIMIM के मुनीर अहमद को 2,290 वोट मिले थे।
बीजेपी और सपा-आरएलडी गठबंधन दोनों ने जाट समाज से उम्मीदवार उतारा था। इसके बावजूद बीजेपी प्रत्याशी महज 1,445 वोटों से चुनाव जीतने में सफल रहीं।
किसे किस वर्ग का मिला समर्थन?
2022 के चुनावी समीकरण में बीजेपी को जाट, सैनी, क्षत्रिय और कश्यप समेत कई वर्गों का समर्थन मिला। वहीं आरएलडी प्रत्याशी नीरज चौधरी को मुस्लिम मतदाताओं के साथ जाट समाज का भी कुछ समर्थन मिला।
बसपा प्रत्याशी को SC मतदाताओं के अलावा वैश्य और पंजाबी समाज से भी समर्थन मिलने की बात सामने आई। हालांकि, जाट समाज का बड़ा हिस्सा बीजेपी की ओर गया और आरएलडी उम्मीदवार को इस समुदाय का पूरा समर्थन नहीं मिल सका।
2024 लोकसभा चुनाव में सपा ने बनाई बढ़त
2024 के लोकसभा चुनाव में बिजनौर विधानसभा क्षेत्र के आंकड़े दिलचस्प रहे। यहां:
- सपा: 89,429 वोट
- RLD-BJP गठबंधन: 88,438 वोट
- BSP: 41,958 वोट
सपा के दीपक सैनी ने बीजेपी-आरएलडी गठबंधन के उम्मीदवार चंदन चौहान को इस विधानसभा क्षेत्र में 991 वोटों से पीछे छोड़ा।
2022 के विधानसभा चुनाव की तुलना में 2024 में RLD-BJP गठबंधन उम्मीदवार को 8,727 वोट कम मिले, जबकि सपा उम्मीदवार को भी 6,291 वोट कम मिले।
2024 में बदला वोटों का समीकरण
2024 के लोकसभा चुनाव में सपा को मुस्लिम और सैनी समाज का अच्छा समर्थन मिलने की बात सामने आई। वहीं RLD-BJP गठबंधन को जाट समाज का बड़ा हिस्सा मिला, हालांकि जाटों का पूरा वोट गठबंधन के पक्ष में नहीं गया।
BSP उम्मीदवार के जाट समाज से होने के कारण इस समुदाय का कुछ वोट बसपा के खाते में भी गया। वहीं सामान्य वर्ग का बड़ा हिस्सा बीजेपी गठबंधन के साथ रहा।
2022 में बसपा को मिले पंजाबी और वैश्य समाज के वोटों में 2024 में बीजेपी की ओर वापसी देखने को मिली।
बिजनौर सीट का अनुमानित जातीय समीकरण
बिजनौर विधानसभा सीट के अनुमानित सामाजिक समीकरण में मुस्लिम और जाट मतदाता सबसे बड़े समूह हैं। इसके बाद SC और विभिन्न OBC समुदायों की महत्वपूर्ण संख्या है।
अनुमानित आंकड़े:
- मुस्लिम: 1 लाख
- जाट: 70 हजार
- SC: 50 हजार
- सैनी: 25 हजार
- राजपूत: 22 हजार
- कश्यप: 12 हजार
- ब्राह्मण: 10 हजार
- पाल: 10 हजार
- नाई: 7 हजार
- प्रजापति: 6 हजार
- बंगाली: 5 हजार
- वैश्य: 5 हजार
- गुर्जर: 5 हजार
- भुईयां: 4 हजार
- पंजाबी: 4 हजार
OBC वोट बन सकता है गेमचेंजर
बिजनौर विधानसभा सीट के सामाजिक समीकरण पर नजर डालें तो मुस्लिम और जाट वोटों के बाद SC वर्ग की संख्या महत्वपूर्ण है। इसके अलावा क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य और पंजाबी समाज के मतदाताओं की संख्या भी मिलाकर करीब 45 हजार के आसपास बताई जाती है।
वहीं पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों के मतदाताओं की संख्या करीब 70 हजार से ज्यादा बताई जा रही है। ऐसे में बिजनौर विधानसभा सीट पर चुनावी मुकाबले में OBC मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
2022 में बीजेपी और सपा-आरएलडी गठबंधन के बीच सिर्फ 1,445 वोटों का अंतर रहा था। 2024 लोकसभा चुनाव में भी दोनों गठबंधनों के बीच मुकाबला बेहद करीबी रहा। ऐसे में आने वाले चुनावों में जातीय समीकरण, गठबंधन और उम्मीदवारों की सामाजिक पकड़ इस सीट का परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
