लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आरक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। लखनऊ में ‘आरक्षण सुधार आंदोलन’ से जुड़े छात्रों से मुलाकात के बाद उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के बयान पर अब एनडीए के भीतर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी LJP-R के सांसद अरुण भारती ने ब्रजेश पाठक के रुख पर सवाल उठाए हैं।
अरुण भारती ने कहा कि आरक्षण किसी की भीख नहीं, बल्कि संविधान से मिला अधिकार है और इसे किसी पत्र या मांग के जरिए खत्म नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याएं वास्तविक हैं और उनकी लड़ाई रोजगार एवं अवसर बढ़ाने को लेकर होनी चाहिए।
‘आरक्षण हटाओ’ पहली बार सुन रहे हैं
अरुण भारती ने कहा, “हमारे देश में जो आंदोलन हुए हैं, वो सकारात्मक हुए हैं—गरीबी हटाओ, भेदभाव हटाओ, दहेज हटाओ। ये पहली बार सुन रहे हैं कि आरक्षण हटाओ।”
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति या समुदाय को मिले अधिकार को छीनने की बात नहीं की जानी चाहिए। उनके मुताबिक, डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान ने आरक्षण का अधिकार दिया है और इसे केवल पत्र लिखकर खत्म नहीं किया जा सकता।
‘आरक्षण कोई भीख नहीं, अधिकार है’
LJP-R सांसद ने कहा कि पार्टी के नेता चिराग पासवान पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि आरक्षण कोई भीख नहीं बल्कि अधिकार है।
अरुण भारती ने कहा, “इसे कोई पत्र लिखकर या मांग से खत्म नहीं कर सकता। ब्रजेश पाठक ने इस मांग को न्यायोचित कहा है। आप संवैधानिक पद पर रहते हुए किसी के अधिकार को छीनने की बात करते हैं, ये कहां से न्यायोचित हो गया?”
उन्होंने कहा कि युवाओं के सामने अवसरों की कमी एक वास्तविक समस्या है। इसलिए बहस आरक्षण खत्म करने के बजाय रोजगार और अवसर बढ़ाने पर होनी चाहिए।
‘आरक्षण हटाओ’ को ‘आरक्षण सुधार’ बताया?
अरुण भारती ने ब्रजेश पाठक के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस पेज के पहले पन्ने पर ‘आरक्षण हटाओ’ लिखा था, उसे उप मुख्यमंत्री ने ‘आरक्षण सुधार’ बताया।
उन्होंने आरोप लगाया, “ये शब्दों का फेर नहीं, ये संदेश का फेर है।”
LJP-R सांसद ने यह भी सवाल उठाया कि आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों के कथित तौर पर यह कहने के बाद कि उनकी कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं हुई थी, ब्रजेश पाठक ने आखिर किससे मुलाकात की और किसका संदेश लेकर दिल्ली गए।
ब्रजेश पाठक ने क्या कहा था?
बता दें कि यूपी के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शनिवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण सुधार आंदोलन कर रहे युवाओं से मुलाकात की थी। इसके बाद लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने कहा था कि सरकार हर युवा के साथ है।
उन्होंने आश्वासन दिया था कि छात्रों की मांगों को बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाया जाएगा और दो दिन के भीतर छात्रों के प्रतिनिधिमंडल की संबंधित केंद्रीय मंत्री से मुलाकात कराई जाएगी।
ब्रजेश पाठक के इस बयान के बाद आरक्षण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अब एनडीए में शामिल LJP-R की प्रतिक्रिया के बाद इस मुद्दे पर गठबंधन के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आने लगी है।
