वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष लगातार 11वें दिन भी जारी है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा को प्रभावित कर दिया है। इस बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने अमेरिकी संसद को बताया कि अब तक इस युद्ध पर 37.5 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक लागत इससे भी अधिक हो सकती है।
11वीं रात भी जारी रहे अमेरिकी हवाई हमले
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने मंगलवार रात लगातार 11वीं रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका जल्द ही ईरान के कथित परमाणु ठिकाने पिकऐक्स माउंटेन पर भी कार्रवाई कर सकता है, जिसे एक अत्यधिक सुरक्षित भूमिगत परिसर माना जाता है।
ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके परमाणु ठिकानों पर हमला किया गया, तो वह इसे क्षेत्रीय युद्ध का विस्तार मानेगा और उसी के अनुरूप जवाब देगा।
कुवैत, बहरीन और जॉर्डन ने रोके हमले
कुवैत, बहरीन और जॉर्डन ने दावा किया कि उन्होंने अपने हवाई क्षेत्र में आए कई हमलों को सफलतापूर्वक रोक दिया। वहीं, ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के जहाजों को चेतावनी जारी की है, जिससे पूरे मध्य पूर्व में संघर्ष और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
युद्ध रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज
सैन्य कार्रवाई के बीच कूटनीतिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचे, जहां उन्होंने पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर से क्षेत्रीय सुरक्षा और युद्ध रोकने के उपायों पर चर्चा की।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन से मुलाकात कर कहा कि अमेरिका लेबनान और इज़राइल के बीच शांति स्थापित करने की कोशिश करेगा। हालांकि, दक्षिणी लेबनान से इज़राइली सेना की वापसी के समय को लेकर उन्होंने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस संघर्ष को रोक पाएंगे या हालात और गंभीर होंगे।
