नई दिल्ली: सुबह की चाय के साथ गरमा-गरम समोसा मिल जाए तो दिन की शुरुआत स्वादिष्ट हो जाती है। बारिश के मौसम में हो या दोस्तों के साथ चाय पर बैठना हो, समोसा भारतीयों के पसंदीदा स्नैक्स में शामिल है। लेकिन स्वाद में लाजवाब लगने वाला समोसा अगर नियमित रूप से और खासकर सुबह के नाश्ते में खाया जाए, तो सेहत के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
समोसा आमतौर पर मैदा, आलू और तेल से तैयार किया जाता है और इसे डीप फ्राई किया जाता है। इसकी वजह से इसमें फैट और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बार-बार या ज्यादा मात्रा में समोसा खाने से स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
बढ़ सकता है अनहेल्दी फैट
समोसे को डीप फ्राई किया जाता है। कई जगहों पर इसे ऐसे तेल में भी तला जाता है जिसे बार-बार गर्म किया जाता है। ऐसे तेल में ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट की मात्रा बढ़ सकती है।
लगातार ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकता है और लंबे समय में हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसे जोखिमों से जुड़ सकता है।
पाचन तंत्र पर पड़ सकता है असर
समोसे की बाहरी परत आमतौर पर मैदा से बनाई जाती है। मैदा में फाइबर की मात्रा कम होती है। ऐसे में ज्यादा समोसा खाने से कुछ लोगों को पेट में भारीपन, कब्ज और दूसरी पाचन संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।
तेजी से बढ़ सकता है ब्लड शुगर
मैदा से बने खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकते हैं। इसके बाद ब्लड शुगर में गिरावट आने पर जल्दी भूख लगने और ऊर्जा के स्तर में उतार-चढ़ाव की समस्या हो सकती है।
डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए ज्यादा मात्रा में मैदा और डीप फ्राइड फूड का सेवन विशेष रूप से नुकसानदायक हो सकता है।
वजन बढ़ने का खतरा
समोसे में मैदा, आलू और तेल का इस्तेमाल होता है, जिसके कारण इसमें कैलोरी, कार्बोहाइड्रेट और फैट की मात्रा अधिक हो सकती है। वहीं, इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और जरूरी मिनरल्स की मात्रा तुलनात्मक रूप से कम होती है।
अगर समोसे को नियमित रूप से डाइट में शामिल किया जाए और शारीरिक गतिविधि कम हो, तो यह वजन बढ़ने में योगदान कर सकता है।
दिल और डायबिटीज का बढ़ सकता है जोखिम
ज्यादा कैलोरी और फैट वाले खाद्य पदार्थों का लगातार सेवन मोटापे के खतरे को बढ़ा सकता है। मोटापा आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज और हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम से जुड़ा हो सकता है।
हालांकि, किसी एक खाद्य पदार्थ को अकेले बीमारी का कारण मानना सही नहीं है। कुल डाइट, लाइफस्टाइल और शारीरिक गतिविधि भी स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बाहर का समोसा खाने में फूड पॉइजनिंग का खतरा
सड़क किनारे या छोटी दुकानों पर अगर साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए तो समोसे के जरिए बैक्टीरिया और दूसरे कीटाणु शरीर में पहुंच सकते हैं। गंदे हाथ, दूषित पानी, गंदे बर्तन या खुले में रखा खाना पेट के संक्रमण, डायरिया और फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है।
कितने समोसे खाना ठीक है?
विशेषज्ञों के अनुसार, समोसे को रोजाना नाश्ते का हिस्सा बनाने से बचना चाहिए। इसे कभी-कभार सीमित मात्रा में खाना बेहतर विकल्प हो सकता है।
अगर समोसा खाने का मन हो तो इसे रोज की डाइट में शामिल करने के बजाय कभी-कभी खाएं। घर पर इसे कम तेल में या बेक/एयर फ्राई करके बनाना भी अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प हो सकता है।
