नई दिल्ली: भारत तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अपनाने वाले देशों में शामिल हो चुका है। ChatGPT, Google Gemini और अन्य AI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करोड़ों भारतीय रोजमर्रा के कामों में कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी AI प्लेटफॉर्म और क्लाउड सेवाओं पर बढ़ती निर्भरता भविष्य में भारत के लिए रणनीतिक, आर्थिक और साइबर सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चुनौतियां पैदा कर सकती है।
विशेषज्ञ इस संभावित जोखिम को ‘किल स्विच’ का नाम दे रहे हैं। उनका कहना है कि यदि किसी कारणवश विदेशी कंपनियां या उनके देशों की सरकारें इन सेवाओं की उपलब्धता सीमित कर दें, तो बैंकिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा, दूरसंचार और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर विदेशी कंपनियों का दबदबा
भारत का बैंकिंग, टेलीकॉम और ऊर्जा क्षेत्र तेजी से क्लाउड आधारित सेवाओं पर निर्भर हो रहा है। इनमें Amazon Web Services (AWS), Microsoft Azure और Google Cloud जैसी विदेशी कंपनियों की बड़ी भूमिका है।
IIIT हैदराबाद के निदेशक डॉ. संदीप के. शुक्ला के अनुसार, केवल डेटा का भारत में मौजूद होना पर्याप्त नहीं है। यदि डेटा तक पहुंच, एन्क्रिप्शन और संचालन का नियंत्रण विदेशी कंपनियों के पास है, तो वास्तविक नियंत्रण भी उनके हाथ में ही रहेगा।
AI सेवाओं की बढ़ती लागत भी चिंता का विषय
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में कई AI सेवाएं सीमित रूप से मुफ्त उपलब्ध हैं, लेकिन भविष्य में अधिकांश प्लेटफॉर्म उपयोग आधारित (Usage-Based) शुल्क मॉडल अपना सकते हैं।
Zoho के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने Big Tech कंपनियों की तुलना ईस्ट इंडिया कंपनी से करते हुए कहा कि भारत अपना डेटा और प्रतिभा उपलब्ध कराता है, जबकि तैयार AI सेवाओं के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। इससे भविष्य में विदेशी मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
विदेशी AI मॉडल पर निर्भरता का जोखिम
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई कंपनी अपने AI मॉडल की उपलब्धता समाप्त कर दे या उसकी शर्तों में बड़ा बदलाव कर दे, तो उन कंपनियों और स्टार्टअप्स पर सीधा असर पड़ सकता है जो पूरी तरह उसी तकनीक पर निर्भर हैं। इसे तकनीकी क्षेत्र में ‘Vendor Lock-in’ कहा जाता है।
डेटा सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता पर सवाल
रिपोर्टों के अनुसार, विदेशी AI प्लेटफॉर्म का उपयोग करने पर उपयोगकर्ताओं का कुछ डेटा विदेश स्थित सर्वरों पर प्रोसेस हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और डिजिटल संप्रभुता (Data Sovereignty) से जुड़े सवाल खड़े होते हैं।
साइबर सुरक्षा रिपोर्टों में भी लगातार बढ़ते साइबर खतरों की ओर संकेत किया गया है, जिससे संवेदनशील डेटा की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
AI का असर IT सेक्टर पर भी
भारत का IT उद्योग दुनिया के सबसे बड़े उद्योगों में से एक है, लेकिन कई विश्लेषकों का मानना है कि AI आधारित ऑटोमेशन के कारण पारंपरिक IT सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है। इससे प्रोजेक्ट्स की प्रकृति, रोजगार और कारोबार के मॉडल में बदलाव देखने को मिल सकता है।
लोकल कॉन्टेक्स्ट वाले AI की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसी भाषाई और सांस्कृतिक विविधता वाले देश में स्थानीय संदर्भों के अनुरूप विकसित AI मॉडल अधिक प्रभावी हो सकते हैं। बिना स्थानीय डेटा और संदर्भ के तैयार मॉडल कई क्षेत्रों में गलत परिणाम दे सकते हैं।
सरकार का फोकस स्वदेशी AI पर
इन चुनौतियों को देखते हुए भारत सरकार IndiaAI Mission के तहत स्वदेशी AI इकोसिस्टम को मजबूत करने पर काम कर रही है। मिशन के अंतर्गत भारतीय AI मॉडल, स्टार्टअप्स, GPU इंफ्रास्ट्रक्चर, AI रिसर्च और कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य 2047 तक भारत को AI क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति तक पहुंचाना है। वहीं OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन भी भारत को AI अपनाने वाले सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में से एक बता चुके हैं।
