नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी एयरस्ट्राइक को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। अमेरिका की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के दक्षिणी इलाकों में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। वहीं, ईरान की ओर से आरोप लगाया गया है कि एक अमेरिकी एयरस्ट्राइक ऐसे रिहायशी मकान पर हुई, जहां शादी समारोह चल रहा था।
इस हमले में लोगों के मारे जाने और घायल होने का दावा किया गया है। घटना के बाद अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और उसकी खुफिया एवं टारगेटिंग क्षमता को लेकर बहस तेज हो गई है।
ईरान में शादी समारोह पर हमले का दावा
CENTCOM के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान की नौसेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें सिरिक आइलैंड पर की गई कार्रवाई भी शामिल बताई गई है।
हालांकि, ईरान की ओर से दावा किया गया कि खुजेस्ताह इलाके में एक रिहायशी मकान पर भी हमला हुआ, जहां विवाह समारोह चल रहा था। ईरानी दावे के अनुसार, हमले में चार लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए हैं।
इस घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने वाली कार्रवाई के दौरान आम नागरिकों को नुकसान से बचाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक और खुफिया जानकारी कितनी सटीक थी।
ट्रंप का बयान भी चर्चा में
इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान भी चर्चा में रहा। मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना की ईरान के शीर्ष नेताओं तक बेहद गहरी खुफिया पहुंच है और यहां तक कहा कि अमेरिका को उनके बाथरूम तक की जानकारी है।
ट्रंप इससे पहले सोशल मीडिया पर ईरान के खर्ग आइलैंड को लेकर भी चेतावनी दे चुके हैं। उनके बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर अमेरिका की ईरान नीति पर लगातार बहस होती रही है।
अमेरिका की टारगेटिंग क्षमता पर उठे सवाल
शादी समारोह वाले इलाके से सामने आए वीडियो को लेकर भी चर्चा हो रही है। उपलब्ध दावों के मुताबिक, जिस इमारत को निशाना बनाया गया, वहां इस्तेमाल किया गया हथियार गाइडेड म्युनिशन हो सकता है।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इलाके में ईरानी नौसेना से जुड़ा एक कम्युनिकेशन टॉवर मौजूद था। अमेरिकी हमले में इस टॉवर के तबाह होने की बात कही गई है। इसी दौरान टॉवर से करीब 150 मीटर दूर स्थित एक मकान पर भी बम गिरने का दावा किया गया है।
हालांकि, हमले की परिस्थितियों और हथियार की सटीक पहचान को लेकर स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने जांच की बात कही
घटना को लेकर अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने जांच की बात कही है। ऐसे में अब यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि अमेरिकी हमला किस लक्ष्य के लिए किया गया था और क्या नागरिकों को नुकसान पहुंचने के पीछे कोई तकनीकी या खुफिया चूक थी।
अगर जांच में यह पुष्टि होती है कि सैन्य लक्ष्य के पास स्थित नागरिक इलाके में गलत निशाना लगा, तो इससे अमेरिका की एयरस्ट्राइक रणनीति और खुफिया तंत्र पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं।
अफगानिस्तान की पुरानी घटनाओं की भी चर्चा
अमेरिकी सैन्य अभियानों के दौरान नागरिकों के मारे जाने की घटनाओं का इतिहास भी इस बहस को और गंभीर बनाता है। अफगानिस्तान में अमेरिकी अभियानों के दौरान शादी समारोहों पर हवाई हमलों के आरोप पहले भी लगते रहे हैं।
2002 में अफगानिस्तान के उरुजगान प्रांत में एक शादी समारोह के दौरान अमेरिकी हवाई हमले में नागरिकों के मारे जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। उस समय अमेरिकी सेना की ओर से इलाके में संदिग्ध तालिबान गतिविधि और गोलीबारी को लेकर कार्रवाई की बात कही गई थी।
इसके अलावा 2008 में कंधार के एक गांव में शादी समारोह के दौरान अमेरिकी हवाई हमले में नागरिकों के मारे जाने की घटना भी सामने आई थी। इन घटनाओं में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के प्रभावित होने की रिपोर्टों के बाद अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आलोचना हुई थी।
बड़ा सवाल- क्या अमेरिका की सैन्य ताकत के बावजूद बढ़ रही हैं चूक?
ईरान में हालिया हमले के दावों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि दुनिया की सबसे ताकतवर सैन्य शक्तियों में शामिल अमेरिका की सटीक एयरस्ट्राइक क्षमता के बावजूद नागरिक इलाकों को नुकसान क्यों पहुंचता है।
अमेरिका के पास अत्याधुनिक मिसाइल, ड्रोन, सैटेलाइट और खुफिया तकनीक मौजूद हैं। ऐसे में अगर किसी सैन्य अभियान में आम नागरिक प्रभावित होते हैं, तो सवाल सिर्फ हथियारों की क्षमता का नहीं बल्कि इंटेलिजेंस, टारगेट की पहचान और हमले के फैसले की प्रक्रिया का भी होता है।
फिलहाल ईरान में शादी समारोह पर हमले से जुड़े दावों की स्वतंत्र और विस्तृत पुष्टि का इंतजार है। जांच के नतीजे ही यह स्पष्ट कर पाएंगे कि यह जानबूझकर किया गया हमला था, खुफिया चूक थी या सैन्य कार्रवाई के दौरान हुई कोई अन्य गलती।
