नई दिल्ली: भारतीय खाद्य निगम (FCI) के चावल आवंटन में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। CBI की एंटी करप्शन यूनिट ने 27 अगस्त 2026 को FIR दर्ज की। मामले में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और सरकारी पद के कथित दुरुपयोग समेत कई आरोप लगाए गए हैं।
CBI के प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, कथित अनियमितताओं के चलते FCI को करीब 28.87 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। FIR में FCI दिल्ली रीजन, NERAMAC के अधिकारियों और निजी कारोबारियों समेत नौ नाम या श्रेणियों को आरोपी बनाया गया है।
62 हजार मीट्रिक टन चावल के आवंटन का मामला
CBI की FIR के मुताबिक, मामला FCI के दिल्ली रीजन से नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चर मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (NERAMAC) को रियायती दर पर चावल आवंटित किए जाने से जुड़ा है।
दस्तावेज के अनुसार, FCI ने NERAMAC को कुल 62,000 मीट्रिक टन चावल आवंटित किया था। इसमें से करीब 50,645 मीट्रिक टन चावल उठाया गया। FIR में कहा गया है कि चावल 23,200 रुपये प्रति मीट्रिक टन की रियायती दर पर दिया गया, जबकि उस समय इसकी रिजर्व कीमत 28,900 रुपये प्रति मीट्रिक टन थी।
बिना ई-नीलामी आवंटन पर CBI के सवाल
CBI ने FIR में आरोप लगाया है कि वित्त वर्ष 2025-26 की ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) नीति के तहत NERAMAC को बिना ई-नीलामी चावल आवंटित करने की पात्रता नहीं थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, बिना ई-नीलामी चावल आवंटित करने की सुविधा राज्य सरकारों और उनकी कॉरपोरेशन के लिए निर्धारित थी। इसके बावजूद NERAMAC को चावल आवंटित किए जाने का आरोप है।
अब CBI यह जांच कर रही है कि चावल आवंटन की प्रक्रिया में संबंधित अधिकारियों और अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।
निजी संस्थाओं के जरिए भुगतान आने का आरोप
FIR के अनुसार, चावल की बिक्री से प्राप्त भुगतान अलग-अलग निजी संस्थाओं के जरिए NERAMAC के खाते में आया और बाद में यह रकम FCI को भेजी गई।
जांच में यह आरोप भी सामने आया कि जिस उद्देश्य से चावल आम लोगों, मजदूरों और प्रवासी कामगारों तक पहुंचाने की बात कही गई थी, उसके अनुरूप वितरण का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला।
CBI का आरोप है कि निजी कारोबारियों ने FCI के डिपो से चावल उठाया और बाद में उसे दूसरे कारोबारियों को बेच दिया। एजेंसी के मुताबिक, इस प्रक्रिया में संबंधित निजी कारोबारियों को बड़ा मुनाफा हुआ।
वितरण दिखाने के लिए फर्जी रिकॉर्ड बनाने का आरोप
FIR में यह भी आरोप लगाया गया है कि आम लोगों के बीच चावल बांटे जाने को दर्शाने के लिए कथित तौर पर फर्जी तारीखवार चार्ट तैयार किए गए।
CBI अब इन दस्तावेजों और चावल के वास्तविक वितरण के बीच अंतर की जांच कर रही है। एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि आवंटित चावल वास्तव में निर्धारित लाभार्थियों तक पहुंचा था या उसे निजी कारोबारियों के जरिए आगे बेच दिया गया।
अप्रैल-मई 2026 में हुआ था आवंटन
CBI के मुताबिक, 13 अप्रैल से 15 मई 2026 के बीच FCI के दिल्ली कार्यालय ने NERAMAC को 62,000 मीट्रिक टन चावल आवंटित किया। इसमें से करीब 50,645 मीट्रिक टन चावल जारी किए जाने की बात FIR में दर्ज है।
जांच एजेंसी के प्रारंभिक आकलन में इस पूरी प्रक्रिया से FCI को करीब 28.87 करोड़ रुपये के कथित नुकसान की बात कही गई है।
FCI और NERAMAC के अधिकारियों समेत 9 नाम/श्रेणियां
FIR में FCI, NERAMAC और निजी कंपनियों से जुड़े कुल नौ नाम या श्रेणियां दर्ज की गई हैं। इनमें FCI दिल्ली रीजन की तत्कालीन GM कुनहिरामन पद्मिनी आशा, AGM (Sales) ब्रह्म प्रकाश, मैनेजर (Sales) अमरेंद्र विक्रम, NERAMAC के तत्कालीन MD भास्कर बरुआ, तत्कालीन AGM अंजल कुमार दत्ता और डिप्टी मैनेजर दिलीप साहा शामिल हैं।
इसके अलावा निजी कंपनियों से जुड़े राजेश बजाज और पंकज सराफ के नाम भी FIR में हैं। साथ ही अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
प्रारंभिक जांच के आधार पर दर्ज हुई FIR
CBI ने FIR में कहा है कि शुरुआती जांच में नामजद लोगों की भूमिका प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराधों से जुड़ी दिखाई दी। इसके बाद नियमित मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
अब CBI चावल के आवंटन, उठाव, भुगतान, वितरण के रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों तथा निजी संस्थाओं की भूमिका की विस्तृत जांच करेगी। फिलहाल FIR में लगाए गए सभी आरोप जांच के अधीन हैं और मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
