नई दिल्ली: Facebook और Instagram की पैरेंट कंपनी Meta ने अमेरिका में बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े एक बड़े मुकदमे को खत्म करने के लिए समझौता किया है। इस समझौते के तहत कंपनी बच्चों के लिए अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई बड़े बदलाव करेगी और करीब 17 अरब डॉलर तक का भुगतान कर सकती है।
यह मामला Meta पर बच्चों और किशोरों को Facebook और Instagram का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करने वाले फीचर्स बनाने के आरोपों से जुड़ा है। हालांकि, Meta ने समझौते में किसी गलती या कानूनी जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं किया है।
Facebook और Instagram पर रोजाना 2 घंटे की लिमिट
समझौते के तहत 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए Facebook और Instagram पर नई डिफॉल्ट लिमिट लागू की जाएगी।फेसबुक और इंस्टाग्राम मिलाकर रोजाना 2 घंटे की लिमिट होगी। यानी दोनों प्लेटफॉर्म पर बिताया गया कुल समय इसी लिमिट में गिना जाएगा। इस लिमिट को हटाने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी होगी।
रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक ऐप बंद
किशोर रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक Facebook और Instagram का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा लगातार सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर उन्हें नियमित ब्रेक लेने के लिए रिमाइंडर भी दिखाए जाएंगे।
स्कूल टाइम में नोटिफिकेशन होंगे म्यूट
सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक डिफॉल्ट रूप से नोटिफिकेशन म्यूट रहेंगे। हालांकि, सीधे मैसेज और सुरक्षा से जुड़े जरूरी अलर्ट इस नियम से बाहर रहेंगे।
इसके साथ ही Meta उम्र की जांच के लिए ज्यादा सख्त तकनीक, आसान पैरेंटल कंट्रोल और बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट से बचाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करेगी।
लाइक काउंट और ब्यूटी फिल्टर पर भी सख्ती
बच्चों की मानसिक सेहत को लेकर जिन फीचर्स पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं, उनमें से कुछ को भी सीमित किया जाएगा। इनमें सार्वजनिक लाइक काउंट और कुछ ब्यूटी फिल्टर जैसे फीचर शामिल हैं।
2023 में कई राज्यों ने किया था मुकदमा
अमेरिका के कई राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने 2023 में Meta के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। आरोप लगाया गया था कि Facebook और Instagram में ऐसे फीचर मौजूद हैं, जो बच्चों और किशोरों को इन प्लेटफॉर्म का ज्यादा इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करते हैं।
राज्यों का आरोप था कि इससे बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। Meta पर बच्चों और माता-पिता को इन संभावित खतरों के बारे में गुमराह करने का आरोप भी लगाया गया था।
समझौते की रकम को लेकर अलग-अलग आंकड़े
समझौते की रकम को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल के मुताबिक राज्यों को 17 अरब डॉलर तक मिल सकते हैं, जबकि Meta ने अपने बयान में कुल भुगतान करीब 18 अरब डॉलर बताया है। विदेशी मीडिया रिपोर्टों में अधिकतम रकम करीब 16.68 अरब डॉलर बताई गई है।
इस रकम का कुछ हिस्सा शर्तों पर निर्भर है। करीब 5 अरब डॉलर से अधिक की अतिरिक्त रकम तभी जारी होगी, जब YouTube और TikTok भी बच्चों की सुरक्षा के लिए समान कदम उठाएं और तय रकम का भुगतान करें।Meta ने कहा है कि वह 2026 की तीसरी तिमाही में इस समझौते के लिए करीब 10 अरब डॉलर का कानूनी खर्च दर्ज करेगी।
YouTube और TikTok पर भी सुरक्षा उपायों की शर्त
Meta का तर्क है कि केवल Facebook और Instagram पर प्रतिबंध लगाने से बच्चों की समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी, क्योंकि वे दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जा सकते हैं।
इसी वजह से समझौते की कुछ रकम YouTube और TikTok द्वारा बच्चों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने पर निर्भर है। प्रस्तावित उपायों में बच्चों के लिए एक घंटे की डेली लिमिट, रात में इस्तेमाल पर रोक और उम्र की जांच जैसे कदम शामिल हैं।
Meta ने आरोपों से किया इनकार
Meta ने कहा है कि किशोरों के लिए सुरक्षित ऑनलाइन अनुभव उसकी प्राथमिकता है। कंपनी ने समझौते में किसी गलती या कानूनी जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं किया है।
कंपनी का कहना है कि समझौते की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि दूसरे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों की सुरक्षा के लिए इसी तरह के कदम उठाते हैं या नहीं।
अभी अदालत की मंजूरी बाकी
समझौते को अभी कैलिफोर्निया की संघीय अदालत से अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। अदालत की मंजूरी के बाद ही इसकी शर्तें लागू होंगी।
हालांकि, इससे Meta की बच्चों और सोशल मीडिया से जुड़ी सभी कानूनी मुश्किलें खत्म नहीं होंगी। कंपनी के खिलाफ इसी विषय से जुड़े अन्य मुकदमे भी जारी हैं।
भारत पर क्या होगा असर?
अमेरिका में हुआ यह समझौता भारत में सीधे तौर पर लागू नहीं होगा, लेकिन इससे बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर दुनियाभर की टेक कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है।
भारत में भी बच्चों के डेटा और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े नियम मौजूद हैं। ऐसे में आने वाले समय में उम्र की जांच, पैरेंटल कंट्रोल और बच्चों के स्क्रीन टाइम को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर और सख्ती देखने को मिल सकती है।
