नई दिल्ली: अमेरिकी सीनेट ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से एक नए प्रतिबंध विधेयक (Sanctions Bill) को मंजूरी दी है। यदि यह विधेयक कानून का रूप लेता है, तो इसका असर भारत समेत कई देशों पर पड़ सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, रूस से बड़े पैमाने पर तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने का प्रावधान प्रस्तावित है।
सीनेट में इस विधेयक के पक्ष में 86 वोट और विरोध में 12 वोट पड़े। हालांकि, यह विधेयक अभी कानून नहीं बना है और इसे लागू करने का अंतिम निर्णय अमेरिकी प्रशासन के हाथ में होगा।
भारत के लिए क्यों अहम है यह बिल?
भारत ने पिछले कुछ महीनों में रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है। ऐसे में यदि यह विधेयक लागू होता है, तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, भारत फिलहाल चीन के बाद रूस से कच्चा तेल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा आयातक है।
ट्रंप प्रशासन का क्या है उद्देश्य?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए यह कदम उठा रहा है। प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य उन देशों पर आर्थिक दबाव बनाना है, जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का आयात जारी रखे हुए हैं।
कुछ देशों को मिल सकती है राहत
‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सांसद रिचर्ड ब्लूमेंथल ने पहले कहा था कि जिन देशों की रूसी गैस खरीद रूस के कुल गैस निर्यात के 15 प्रतिशत से कम होगी, उन्हें कुछ राहत देने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
पहले भी टैरिफ को लेकर बढ़ा था तनाव
अमेरिका पहले भी भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने पर टैरिफ लगाने की चेतावनी दे चुका है। रिपोर्टों के अनुसार, अगस्त 2025 में भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए गए थे, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंध प्रभावित हुए थे। बाद में परिस्थितियों के अनुसार कुछ राहत भी दी गई थी।
यदि अमेरिकी प्रशासन इस नए विधेयक को कानून के रूप में लागू करता है, तो भारत सहित कई देशों के व्यापार और ऊर्जा आयात पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
