नई दिल्ली: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। शुरुआत में नेपाल ने भारत समेत अन्य देशों से मदद लेने से इनकार किया था, लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन में आ रही चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच अब नेपाल ने सीमित विदेशी सहायता लेने पर सहमति जताई है।
नेपाल के अनुरोध पर भारत ने तत्काल कदम उठाते हुए टनल रेस्क्यू टीम भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि सबसे पहले एक रेकी टीम नेपाल भेजी जा रही है, जो जमीन पर हालात का जायजा लेगी और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए जरूरी उपकरणों की पहचान करेगी।
भारत भेज रहा मेडिकल टीम
भारत की ओर से नेपाल में एक मेडिकल टीम भी भेजी जा रही है। इसके अलावा प्रभावित इलाकों में कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए भारत ने बेली ब्रिज और तकनीकी टीमों की मदद देने की पेशकश की है।
रणधीर जायसवाल के मुताबिक, एक बेली ब्रिज पहले से ही नेपाल में मौजूद है, जिसका इस्तेमाल राहत और संपर्क बहाली के काम में किया जा सकता है। भारत का उद्देश्य बचाव एवं राहत कार्यों में नेपाल को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराना है।
अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद नेपाल ने बदला फैसला
‘द काठमांडू पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों में कई देशों के नागरिकों के लापता होने के बाद नेपाल सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा था। कई देशों ने नेपाल से अपने विशेष सर्च-एंड-रेस्क्यू दल और विशेषज्ञों को भेजने की अनुमति देने की अपील की थी।
नेपाल के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से काफी दबाव था कि कम से कम सर्च-एंड-रेस्क्यू टीमों और विशेषज्ञों को प्रभावित इलाकों में आने की अनुमति दी जाए। इसके बाद नेपाल ने कुछ खास क्षेत्रों में सीमित संख्या में विशेषज्ञों को प्रवेश की अनुमति देने का फैसला किया।
हाइड्रोपावर टनल में फंसे लोगों की तलाश जारी
रसुवा और नुवाकोट में हाइड्रोपावर टनल के अंदर अभी भी दर्जनों लोगों का पता नहीं चल पाया है। बाढ़ और आपदा की गंभीरता को देखते हुए इन इलाकों में विशेष टनल-रेस्क्यू विशेषज्ञता की जरूरत बढ़ गई है।
भारत की टनल रेस्क्यू टीम इसी चुनौती से निपटने में नेपाल की मदद करेगी। रेकी टीम के आकलन के बाद जरूरी उपकरणों और बचाव अभियान की आगे की रणनीति तय की जाएगी।
भारत की ओर से मेडिकल सहायता, तकनीकी विशेषज्ञता और बेली ब्रिज उपलब्ध कराने की पेशकश को नेपाल में जारी राहत एवं बचाव अभियान के लिए महत्वपूर्ण सहयोग माना जा रहा है।
