नेपाल ने चीन-अमेरिका समेत कई देशों की मदद ठुकराई

नेपाल ने चीन-अमेरिका समेत कई देशों की मदद ठुकराई

काठमांडू: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि लापता लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। इस बीच नेपाल सरकार ने चीन और अमेरिका समेत कई देशों से मिली सर्च एंड रेस्क्यू टीम भेजने की पेशकश को स्वीकार नहीं किया है।

नेपाल सरकार का कहना है कि देश की अपनी सुरक्षा एजेंसियां राहत और बचाव अभियान चलाने में सक्षम हैं। सरकार ने यह फैसला 2015 में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान विदेशी बचाव दलों के बीच समन्वय और प्रबंधन में आई समस्याओं के अनुभव के आधार पर लिया है।

2015 के भूकंप से लिया सबक

नेपाली विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, 2015 के भूकंप के बाद बड़ी संख्या में विदेशी बचाव दल नेपाल पहुंचे थे। उस दौरान अलग-अलग देशों की टीमों के बीच समन्वय की कमी, प्रबंधन संबंधी दिक्कतें और एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश जैसी परिस्थितियां सामने आई थीं।

इन समस्याओं के चलते राहत और बचाव अभियान को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में नेपाल सरकार को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। इसी अनुभव से सबक लेते हुए बालेन शाह सरकार ने इस बार राहत और बचाव अभियान को मुख्य रूप से अपने नियंत्रण में रखने का फैसला किया है।

रिपोर्टों के मुताबिक, यह निर्णय नेपाली सेना और नेपाल पुलिस की सिफारिश पर लिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार को भरोसा दिलाया है कि सेना और पुलिस कठिन परिस्थितियों में खोज एवं बचाव अभियान को प्रभावी तरीके से चला सकती हैं।

चीन समेत कई देशों की मदद ठुकराई

नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, चीन और अन्य मित्र देशों की ओर से सहायता और अपनी विशेष टीमें भेजने के प्रस्ताव मिले थे। हालांकि, नेपाल सरकार ने इन प्रस्तावों को विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर दिया।

नेपाल के मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि जहां भी अतिरिक्त तकनीकी क्षमता की आवश्यकता होगी, वहां जरूरत के अनुसार सहयोग लिया जाएगा। यानी नेपाल ने विदेशी सहायता के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए हैं, बल्कि सर्च और रेस्क्यू टीमों के मामले में अपनी एजेंसियों को प्राथमिकता दी है।

भारत से मदद स्वीकार कर रहा नेपाल

हालांकि, नेपाल ने भारत की ओर से दी जा रही राहत सहायता को स्वीकार किया है। भारत ने नेपाल को राहत सामग्री, मेडिकल सप्लाई और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाए हैं।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर के मुताबिक, नेपाल में कुछ लोगों के टनल के अंदर फंसे होने की संभावना है। इसे देखते हुए भारत टनलिंग विशेषज्ञों के साथ एक टीम भेजने की तैयारी कर रहा है।

भारत की ओर से नेपाल को बेली ब्रिज उपलब्ध कराने की भी पेशकश की गई है। इन पुलों को विशेष टीमों की मदद से कम समय में तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा मेडिकल टीमें भेजने की भी तैयारी है।

जयशंकर के अनुसार, अगर नेपाल को NDRF की जरूरत होगी तो भारत उन्हें भी भेजने के लिए तैयार है। राहत सामग्री लेकर भारत के दो विमान पहले ही नेपाल पहुंच चुके हैं, जबकि तीसरे विमान के भी रवाना होने की जानकारी दी गई है।

राहत अभियान पर टिकी दुनिया की नजर

नेपाल में बाढ़ से पैदा हुए संकट के बीच सरकार के इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। एक तरफ नेपाल अपनी सेना और पुलिस के जरिए बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान चला रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत तकनीकी विशेषज्ञता, राहत सामग्री और मेडिकल सहायता के जरिए सहयोग कर रहा है।

आने वाले दिनों में टनल में फंसे लोगों की तलाश और प्रभावित इलाकों में कनेक्टिविटी बहाल करना नेपाल के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।

संबंधित पोस्ट