वर्षों से मोटापा मापने के लिए बॉडी मास इंडेक्स (BMI) का इस्तेमाल किया जाता रहा है। डॉक्टर किसी व्यक्ति की लंबाई और वजन के आधार पर यह तय करते हैं कि वह सामान्य वजन, अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में आता है या नहीं। हालांकि अब स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केवल BMI के आधार पर किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य का सही आकलन करना पर्याप्त नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई लोगों का BMI सामान्य होता है, लेकिन पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी उन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे में डाल सकती है।
कमर और लंबाई का अनुपात होगा नया पैमाना
इसी को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्कूलों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच के दौरान वेस्ट-टू-हाइट रेशियो (Waist-to-Height Ratio)को भी शामिल करने की सिफारिश की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तरीका शरीर, खासकर पेट के आसपास जमा चर्बी का अधिक सटीक आकलन करता है और भविष्य में होने वाली कई गंभीर बीमारियों के जोखिम का बेहतर संकेत देता है।
BMI की क्या है सीमा?
BMI की गणना व्यक्ति के वजन को उसकी लंबाई (मीटर) के वर्ग से भाग देकर की जाती है। यह तरीका सरल और कम खर्चीला होने के कारण दुनिया भर में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसकी एक बड़ी कमी यह है कि यह मांसपेशियों और शरीर की चर्बी में अंतर नहीं कर पाता।
उदाहरण के लिए, किसी खिलाड़ी का BMI अधिक हो सकता है क्योंकि उसके शरीर में मांसपेशियां ज्यादा होती हैं, जबकि उसके शरीर में अतिरिक्त चर्बी नहीं होती। वहीं, सामान्य BMI वाले व्यक्ति के पेट पर अधिक फैट होने से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जोखिम मौजूद हो सकते हैं।
पेट की चर्बी क्यों है सबसे ज्यादा खतरनाक?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पेट के आसपास जमा चर्बी सबसे अधिक चिंता का विषय है। यह लीवर, पैंक्रियास और आंतों जैसे महत्वपूर्ण अंगों के आसपास जमा होकर शरीर में सूजन बढ़ा सकती है और इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती है।
कैसे निकालें Waist-to-Height Ratio?
इस अनुपात की गणना करना काफी आसान है। इसके लिए:
वेस्ट-टू-हाइट रेशियो = कमर की माप ÷ लंबाई
ध्यान रखें कि कमर और लंबाई दोनों की माप एक ही इकाई (जैसे सेंटीमीटर) में होनी चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी वयस्क की कमर उसकी कुल लंबाई के आधे से कम होनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी व्यक्ति की लंबाई 170 सेंटीमीटर है, तो उसकी कमर 85 सेंटीमीटर से कम होना बेहतर माना जाता है।
सिर्फ BMI या कमर का साइज ही नहीं, इन बातों का भी रखें ध्यान
डॉक्टरों का कहना है कि किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य का सही आकलन केवल वजन या कमर की माप से नहीं किया जा सकता। इसके साथ ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, खानपान, शारीरिक गतिविधि, पारिवारिक मेडिकल हिस्ट्री और लाइफस्टाइल जैसे अन्य महत्वपूर्ण कारकों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
