सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को गिराए जाने की कार्रवाई के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे संविधान और कानून के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के नेताओं ने पूरी रात अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन तमाम जानकारी और दस्तावेज दिए जाने के बावजूद मस्जिद को गिरा दिया गया।
इमरान मसूद ने कहा कि कांग्रेस इस मामले को कानून के दायरे में रहकर हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएगी। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद काफी पुरानी थी और उसके मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज भी मौजूद हैं।
‘मस्जिद 1911 से पहले की है’
कांग्रेस सांसद ने मस्जिद की पुरातनता और जमीन के मालिकाना हक का जिक्र करते हुए कहा कि मस्जिद 1911 से पहले की है। उनके मुताबिक, मस्जिद की मिल्कियत से जुड़े रिकॉर्ड में वहीद खान और याकूब खान के नाम दर्ज हैं।
इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश में 30 दिन का समय दिया गया था और उनके मुताबिक 24 तारीख को इस मामले में स्टे भी हो गया था। उन्होंने दावा किया कि इसके बावजूद कार्रवाई कर मस्जिद को गिरा दिया गया।
वक्फ और कानूनी प्रक्रिया को लेकर उठाए सवाल
इमरान मसूद ने हाई कोर्ट की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में वक्फ को पक्षकार नहीं बनाया गया और वक्फ बोर्ड को भी पार्टी नहीं बनाया गया।
उन्होंने वक्फ कानून और ‘वक्फ बाय यूजर’ से जुड़े प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि पुराने वक्फ से संबंधित प्रावधानों पर भी विचार किया जाना चाहिए था।
कांग्रेस सांसद ने मस्जिद की जमीन के टाइटल को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि केवल खसरे के आधार पर जमीन पर मालिकाना हक साबित नहीं किया जा सकता, क्योंकि खसरा मुख्य रूप से मौजूदा स्थिति की जानकारी देता है।
‘रातोंरात चारों तरफ से घेरकर मस्जिद गिरा दी’
मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई पर इमरान मसूद ने दावा किया कि इलाके को रातोंरात चारों तरफ से घेर लिया गया था। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के नेता और एमएलसी पूरी रात अधिकारियों से संपर्क करने और मौके की स्थिति जानने की कोशिश करते रहे।
उन्होंने आरोप लगाया कि इलाके को घेरकर लोगों को उनके घरों में रहने के लिए मजबूर किया गया और इसके बाद मस्जिद को गिरा दिया गया।
इमरान मसूद ने कहा कि यह केवल मस्जिद से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि इसे संविधान से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि “मस्जिद डिमोलिश नहीं हो रही है, ये देश के संविधान के ऊपर हथौड़ा चल रहा है।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले में कानूनी लड़ाई जारी रखेगी और जरूरत पड़ने पर हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी।
‘सहारनपुर के लोगों के लिए काला दिन’
कांग्रेस सांसद ने मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई को सहारनपुर के लोगों के लिए ‘काला दिन’ बताया। उन्होंने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने की अपील की।
इमरान मसूद ने कहा कि लोगों को काली पट्टी बांधकर इस कार्रवाई का विरोध करना चाहिए और कानून के दायरे में रहकर इस लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाना चाहिए।
उन्होंने सरकार पर राजनीतिक एजेंडे के तहत कार्रवाई करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, इन आरोपों पर सरकार और प्रशासन का पक्ष इस खबर के लिए अलग से सामने नहीं आया है।
सरकार पर लगाया राजनीतिक एजेंडे का आरोप
इमरान मसूद ने उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार के पास अपनी उपलब्धियां बताने के बजाय धार्मिक स्थलों और बुलडोजर कार्रवाई को लेकर राजनीति करने का एजेंडा है।
उन्होंने कहा कि किसी भी धर्मस्थल को गिराए जाने से किसी भी समुदाय के व्यक्ति को खुश नहीं होना चाहिए। उन्होंने लोगों से इस तरह की कार्रवाई के खिलाफ शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से आवाज उठाने की अपील की।
मामले पर आगे बढ़ सकती है कानूनी लड़ाई
मस्जिद गिराए जाने के बाद अब इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ कानूनी लड़ाई भी तेज होने के संकेत हैं। इमरान मसूद ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस इस मुद्दे को अदालत में उठाएगी।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन की कार्रवाई को लेकर अदालत में क्या दलीलें सामने आती हैं और मस्जिद की जमीन, मालिकाना हक तथा वक्फ से जुड़े दावों पर न्यायालय का क्या रुख रहता है।
