नई दिल्ली: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में एंग्जायटी (Anxiety) एक आम मानसिक स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। काम का दबाव, पढ़ाई, रिश्तों की परेशानी और भविष्य को लेकर चिंता जैसी कई वजहों से लोगों में एंग्जायटी के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति में इसकी गंभीरता एक जैसी नहीं होती।
एंग्जायटी के लक्षणों और उनकी गंभीरता को समझने के लिए डॉक्टरों की ओर से GAD-7 टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कुल 7 सवाल होते हैं और जवाबों के आधार पर 0 से 21 तक स्कोर मिलता है।
GAD-7 स्कोर में किस स्तर की एंग्जायटी?
GAD-7 में मिले अंकों के आधार पर एंग्जायटी को आमतौर पर चार स्तरों में बांटा जाता है:
- 0-4 अंक: बहुत कम या सामान्य चिंता
- 5-9 अंक: हल्की एंग्जायटी
- 10-14 अंक: मध्यम स्तर की एंग्जायटी
- 15-21 अंक: गंभीर एंग्जायटी
एंग्जायटी लेवल 3 यानी 10-14 अंक का क्या मतलब है?
अगर किसी व्यक्ति का GAD-7 स्कोर 10 से 14 के बीच आता है, तो इसे मध्यम स्तर की एंग्जायटी माना जाता है। इस स्तर पर चिंता के लक्षण बार-बार महसूस हो सकते हैं और रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लग सकते हैं।
पढ़ाई, नौकरी, घर के काम या सामाजिक गतिविधियों में ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है। इस स्तर का स्कोर जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर (GAD) की संभावना की ओर संकेत कर सकता है।
हालांकि, सिर्फ GAD-7 स्कोर के आधार पर किसी व्यक्ति को मानसिक बीमारी होने का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। सही जांच और निदान के लिए डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
दुनिया में कितने लोग एंग्जायटी से जूझ रहे हैं?
उपलब्ध वैश्विक आंकड़ों के मुताबिक, एंग्जायटी डिसऑर्डर दुनिया भर में बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करता है। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया की करीब 4.05% आबादी यानी लगभग 30 करोड़ 10 लाख लोग एंग्जायटी डिसऑर्डर से प्रभावित हैं।
इन आंकड़ों में चीन में करीब 4 करोड़ 78 लाख और भारत में करीब 4 करोड़ 18 लाख लोगों के प्रभावित होने का अनुमान बताया गया है। इसके बाद अमेरिका, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे देश आते हैं।
वहीं, WHO की रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में दुनिया भर में करीब 35 करोड़ 90 लाख लोग एंग्जायटी की समस्या से प्रभावित थे, जो वैश्विक आबादी का लगभग 4.4% हिस्सा था।
भारत में भी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित
भारत में भी एंग्जायटी एक महत्वपूर्ण मानसिक स्वास्थ्य चुनौती है। 2017 में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, भारत में करीब 4 करोड़ 49 लाख लोग एंग्जायटी डिसऑर्डर से प्रभावित पाए गए थे।
नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे के आंकड़ों में भी देश की आबादी के एक हिस्से में तनाव और एंग्जायटी जैसी समस्याएं पाए जाने की बात सामने आई है। युवाओं में यह समस्या विशेष रूप से चिंता का विषय है।
महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है एंग्जायटी
उपलब्ध अध्ययनों के अनुसार, एंग्जायटी की समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक देखी जा सकती है। युवाओं में पढ़ाई, करियर, नौकरी, रिश्ते और भविष्य से जुड़ी चिंताएं इसके प्रमुख कारणों में शामिल हो सकती हैं।
पाकिस्तान में एंग्जायटी को लेकर राष्ट्रीय स्तर का सटीक सर्वे उपलब्ध नहीं है। हालांकि, कराची में हुई एक स्टडी में अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके साथ मौजूद लोगों में एंग्जायटी के लक्षण पाए गए थे और महिलाओं में इसकी दर अधिक बताई गई।
कब लें डॉक्टर की मदद?
अगर चिंता लगातार बनी रहती है, रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगते हैं, नींद में परेशानी होती है या व्यक्ति अपने लक्षणों को संभाल नहीं पा रहा है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करना बेहतर है।
GAD-7 एक स्क्रीनिंग टूल है, खुद से बीमारी तय करने का तरीका नहीं। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
