महोबा जिला महिला अस्पताल में GPF घोटाले का खुलासा, करीब 1 करोड़ की हेराफेरी की जांच तेज

महोबा जिला महिला अस्पताल में GPF घोटाले का खुलासा, करीब 1 करोड़ की हेराफेरी की जांच तेज

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महोबा: उत्तर प्रदेश के महोबा स्थित जिला महिला चिकित्सालय में कर्मचारी भविष्य निधि (GPF) से जुड़ी करीब एक करोड़ रुपये की वित्तीय हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद शासन और प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। मामले में GPF पटल का काम देख रहे वरिष्ठ सहायक (लिपिक) संतोष कुमार वर्मा जांच के घेरे में हैं। लंबे समय तक सामने नहीं आने के बाद अब वह ऑडिट टीम के सामने पेश हुए और जांच में सहयोग करने की बात कही है।

CAG ऑडिट में सामने आई वित्तीय गड़बड़ी

मामला तब सामने आया जब प्रयागराज से आई CAG की तीन सदस्यीय टीम ने जिला महिला चिकित्सालय का ऑडिट शुरू किया। जांच के दौरान GPF खातों में कथित फर्जी लेन-देन और वित्तीय अनियमितताओं का पता चला।

प्रारंभिक जांच के मुताबिक, GPF पटल की जिम्मेदारी संभाल रहे वरिष्ठ सहायक संतोष कुमार वर्मा से जुड़े खाते से करीब 84.66 लाख रुपयेऔर अस्पताल के चालक अंबिका शर्मा के खाते से बिना आवेदन के करीब 15 लाख रुपये निकाले जाने की बात सामने आई है।

ऑडिट टीम मामले से जुड़े दस्तावेजों और अभिलेखों की गहनता से जांच कर रही है।

गड़बड़ी सामने आने के बाद कार्यालय से गायब हुआ था आरोपी

मामला उजागर होने के बाद संतोष कुमार वर्मा कथित तौर पर बिना सूचना दिए कार्यालय से अनुपस्थित हो गए थे। आरोप है कि वह कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी अपने साथ ले गए थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल के CMS डॉ. रमाकांत चौरिया ने उनके पनवाड़ी और ललितपुर स्थित पते पर स्पीड पोस्ट के जरिए दो बार नोटिस भेजा। नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर विभागीय व्हाट्सऐप ग्रुप में सख्त चेतावनी दी गई कि जांच में उपस्थित होकर सहयोग नहीं करने पर पुलिस में FIR दर्ज कराई जाएगी।

ऑडिट टीम के सामने पेश हुए संतोष वर्मा

पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी की आशंका के बीच संतोष कुमार वर्मा आखिरकार ऑडिट टीम के सामने पेश हो गए। उन्होंने GPF पासबुक और सर्विस बुक समेत मांगे गए अभिलेख जांच टीम को सौंपे और अपना पक्ष रखा।

इस दौरान CMS डॉ. रमाकांत चौरिया, वरिष्ठ चिकित्सकों और अस्पताल के अन्य कर्मचारियों की मौजूदगी में उनसे कई घंटे तक पूछताछ की गई।

अगले सप्ताह फिर महोबा आएगी जांच टीम

चिकित्सा अधिकारियों के मुताबिक, ऑडिट टीम उत्तर प्रदेश शासन, स्वास्थ्य महानिदेशालय और जिला प्रशासन से संबंधित ई-मेल आईडी भी अपने साथ ले गई है। टीम अगले सप्ताह फिर महोबा पहुंचकर मामले की विस्तृत और बिंदुवार जांच करेगी।

जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि किस तारीख को कितनी रकम निकाली गई, पैसे निकालने के लिए किस माध्यम का इस्तेमाल हुआ और कथित वित्तीय अनियमितता में अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल हैं या नहीं।

जांच रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई

सीएमओ डॉ. विनय कुमार ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल ऑडिट टीम दस्तावेजों और लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

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