नई दिल्ली: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर 21 दिन की फरलो मिल गई है। मंगलवार सुबह करीब 6 बजे उसे रोहतक की सुनारिया जेल से कड़ी सुरक्षा के बीच रिहा किया गया। राम रहीम को यह फरलो 30 दिन की पैरोल पूरी करने के बाद 26 जून को जेल लौटने के दो महीने से भी कम समय के भीतर मिली है।
2017 से 17 बार मिल चुकी है पैरोल-फरलो
अगस्त 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद से राम रहीम को अब तक 17 बार अस्थायी रिहाई, यानी पैरोल और फरलो, मिल चुकी है। इन रिहाइयों के दौरान वह कुल मिलाकर 435 से ज्यादा दिन जेल से बाहर रहा है।
राम रहीम को दो महिला शिष्याओं से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद अगस्त 2017 में पहली बार सुनारिया जेल भेजा गया था।
किस मामले में काट रहा है सजा?
गुरमीत राम रहीम सिंह दो महिला शिष्याओं के साथ दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहा है। CBI की विशेष अदालत ने उसे 20 साल की कड़ी सजा सुनाई थी, जिसमें 10-10 साल की दो लगातार सजाएं शामिल हैं।वह फिलहाल हरियाणा के रोहतक स्थित सुनारिया जेल में बंद है। हत्या के दो मामलों में भी उसे दोषी ठहराया गया था, हालांकि इन मामलों में उसे उच्च न्यायालय से राहत मिल चुकी है।
2020 से 2026 तक कई बार मिली रिहा
ईराम रहीम को अलग-अलग मौकों पर पैरोल और फरलो मिलती रही है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक:
24 अक्टूबर 2020: 1 दिन की पैरोल
21 मई 2021: 12 घंटे की पैरोल
फरवरी 2022: 21 दिन की फरलो
जून 2022: 30 दिन की पैरोल
14 अक्टूबर 2022: 40 दिन की पैरोल
21 जनवरी 2023: 40 दिन की पैरोल
20 जुलाई 2023: 30 दिन की पैरोल
20 नवंबर 2023: 21 दिन की फरलो19 जनवरी 2024: 50 दिन की पैरोल2 अक्टूबर 2024: 20 दिन की पैरोल
28 जनवरी 2025: 30 दिन की पैरोल
9 अप्रैल 2025: 21 दिन की फरलो
5 अगस्त 2025: 40 दिन की पैरोल
मई 2026: 30 दिन की पैरोल
अगस्त 2026: 21 दिन की फरलो
दूसरे प्रभावशाली कैदियों से कितनी अलग है स्थिति?
गंभीर अपराधों में सजा काट रहे कैदियों को पैरोल या फरलो मिलना असामान्य नहीं है, लेकिन राम रहीम को बार-बार और कम अंतराल में मिली अस्थायी रिहाइयों ने सवाल जरूर खड़े किए हैं।
अभिनेता संजय दत्त को भी आर्म्स एक्ट मामले में सजा के दौरान कई बार पैरोल और फरलो मिली थी और वह 140 से ज्यादा दिन जेल से बाहर रहे थे। वहीं जेसिका लाल हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे मनु शर्मा को भी कई बार पैरोल मिलने पर विवाद हुआ था।
हरियाणा में पैरोल देने का अधिकार किसके पास?
भारत में जेल प्रशासन और पैरोल से जुड़े नियम राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। पैरोल किसी अदालत की ओर से स्वतः नहीं दी जाती, बल्कि संबंधित राज्य के नियमों के तहत प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए मंजूरी मिलती है।
हरियाणा में गंभीर अपराधों के मामलों में पैरोल पर फैसला निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की मंजूरी के आधार पर किया जाता है। वहीं आपात परिस्थितियों में जेल प्रशासन की ओर से सीमित अवधि की कस्टडी पैरोल का प्रावधान भी हो सकता है।
राम रहीम की पैरोल पर क्यों उठते रहे हैं सवाल?
राम रहीम को बार-बार मिली अस्थायी रिहाई को लेकर समय-समय पर राजनीतिक और सामाजिक बहस होती रही है। खास तौर पर दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध में 20 साल की सजा काट रहे कैदी को लगातार पैरोल और फरलो मिलने को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
हालांकि, पैरोल या फरलो की मंजूरी संबंधित राज्य के नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत होती है। इसलिए किसी भी रिहाई को समझने के लिए उस समय लागू नियमों और मंजूरी के आधार को देखना जरूरी है।
