राहुल गांधी की छात्र रैलियों पर नजर रखेगी ‘झूठ की गूंज’ वेबसाइट, 40 दावों का फैक्ट चेक करने का दावा

राहुल गांधी की छात्र रैलियों पर नजर रखेगी ‘झूठ की गूंज’ वेबसाइट, 40 दावों का फैक्ट चेक करने का दावा

नई दिल्ली: राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रमों में दिए गए बयानों की तथ्य-जांच के लिए ‘झूठ की गूंज’ नाम की एक वेबसाइट सामने आई है। वेबसाइट को एक तरह के फैक्ट-चेक ट्रैकर के रूप में पेश किया गया है, जिसका मकसद राहुल गांधी की छात्र रैलियों में किए गए दावों की सच्चाई की जांच करना बताया गया है।

यह वेबसाइट 26 अगस्त 2026 को लॉन्च की गई। वेबसाइट का डोमेन jhoothkigoonj.com है। साइट पर टैगलाइन दी गई है— ‘चार रैली, चालीस दावे और एक जवाब।’

40 बयानों की समीक्षा का दावावे

बसाइट के मुताबिक, जून से अगस्त 2026 के बीच कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रमों के दौरान दिए गए 40 बयानों की समीक्षा की गई है।

वेबसाइट का दावा है कि इनमें सरकारी नौकरियों, बेरोजगारी, शिक्षा और अपराध जैसे मुद्दों से जुड़े 29 बयानों को गलत और 11 को गुमराह करने वाला बताया गया है।

इसके लिए सरकारी आंकड़ों और अन्य सार्वजनिक स्रोतों समेत 134 स्रोतों का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया है।

नौकरी और अपराध से जुड़े दावों की भी जांच

‘झूठ की गूंज’ वेबसाइट पर भर्ती से जुड़े आंकड़ों और अपडेटेड सर्वे के आधार पर नौकरी के उम्मीदवारों से जुड़े दावों की समीक्षा की गई है। इसके अलावा रिपोर्ट न किए जाने वाली यौन हिंसा से जुड़े आंकड़ों को लेकर भी उदाहरण और तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं।

वेबसाइट का उद्देश्य राहुल गांधी के कार्यक्रमों में दिए गए बयानों को उपलब्ध आंकड़ों और स्रोतों से मिलाकर उनकी तथ्यात्मकता परखना बताया गया है।

कौन चला रहा है वेबसाइट?

वेबसाइट को किसी एक व्यक्ति या संगठन की पहल के बजाय इंटरनेट यूजर्स, डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स और राजनीतिक विषयों पर नजर रखने वाले लोगों की पहल के रूप में बताया जा रहा है।

हालांकि, वेबसाइट के पीछे कौन लोग हैं और इसका संचालन किस संगठन या व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है, इसे लेकर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इसके दावों को स्वतंत्र स्रोतों से सत्यापित करना भी महत्वपूर्ण है।

सोशल मीडिया पर चर्चा में आई वेबसाइट

लॉन्च होने के बाद यह वेबसाइट सोशल मीडिया पर चर्चा में है। कई यूजर्स इसे शेयर कर रहे हैं और इसे राहुल गांधी के छात्र कार्यक्रमों में किए गए दावों की पड़ताल करने वाले फैक्ट-चेक प्लेटफॉर्म के रूप में देखा जा रहा है।

इन्फ्लुएंसर्स विवाद के बीच बढ़ी चर्चा

‘झूठ की गूंज’ वेबसाइट की चर्चा ऐसे समय में हुई है, जब राहुल गांधी के छात्र कार्यक्रमों में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की मौजूदगी को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए हैं।

बीजेपी प्रवक्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया था कि कांग्रेस सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 25 से 35 हजार रुपये तक का भुगतान कर रही थी, ताकि डिजिटल प्रचार को GenZ के समर्थन के रूप में पेश किया जा सके।

इन आरोपों को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

रैलियों से जुड़े वायरल वीडियो पर भी फैक्ट चेक

राहुल गांधी के कार्यक्रमों को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ वीडियो और पोस्ट भी फैक्ट-चेक के दायरे में आए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इनमें डिजिटल रूप से बदले गए वीडियो और पुराने फुटेज के इस्तेमाल के दावे शामिल थे।

एक मामले में ऐसा वीडियो वायरल हुआ जिसमें कथित तौर पर भीड़ के मोदी के समर्थन में नारे लगाने का दावा किया गया था। वहीं एक अन्य वायरल पोस्ट में रैली की भारी भीड़ दिखाने के लिए पुराने इंटरनेशनल स्टेडियम के फुटेज के इस्तेमाल का दावा सामने आया।

ऐसे मामलों में किसी भी दावे को सही या गलत मानने से पहले मूल वीडियो, तारीख, स्थान और संबंधित विश्वसनीय स्रोतों की जांच जरूरी है।

राजनीतिक बहस के बीच फैक्ट-चेकिंग की नई पहल

GenZ को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती सक्रियता के बीच ‘झूठ की गूंज’ जैसी वेबसाइट का सामने आना डिजिटल राजनीति में फैक्ट-चेकिंग की बढ़ती भूमिका को दिखाता है। हालांकि, वेबसाइट द्वारा किए गए दावों और उसके निष्कर्षों को पढ़ते समय उसके इस्तेमाल किए गए मूल स्रोतों की भी जांच करना जरूरी होगा।

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