नई दिल्ली: उत्तराखंड के हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ विवाद और राहुल गांधी के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट में एफआईआर के बीच अब बेंगलुरु में बीजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने का मामला सामने आया है। इसको लेकर बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने इसे वोट और तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया।
पूजा को ‘शुद्धिकरण’ का रूप देने का लगाया आरोप
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि बीजेपी के कार्यक्रमों में विधि-विधान से देवी-देवताओं की पूजा करने की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि बड़े कार्यक्रमों और बैठकों की शुरुआत में गणेश जी या हनुमान जी की पूजा-अर्चना की जाती है।
बीजेपी नेता ने कहा कि स्कूलों में भी कार्यक्रमों की शुरुआत मां सरस्वती की पूजा से होती है। उनका आरोप है कि बीजेपी के एक कार्यक्रम में हुई पूजा को कांग्रेस ने अलग तरीके से पेश करते हुए उसे ‘शुद्धिकरण’ का नाम दे दिया।
‘कांग्रेस को इस राजनीति से फायदा नहीं होगा’
बृजभूषण ने दावा किया कि इसी विवाद के चलते बेंगलुरु में बीजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह की राजनीति से पार्टी को कोई फायदा नहीं होने वाला है।
उन्होंने कहा कि दलित वोटरों को अपने पक्ष में करने की कोशिश सभी राजनीतिक दल करते हैं, लेकिन उनके मुताबिक मौजूदा समय में दलित समाज का समर्थन बीजेपी के साथ अधिक है।
राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
बृजभूषण शरण सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि चुनाव नजदीक आने पर राहुल गांधी ‘हिंदू बनने की कोशिश’ करेंगे, जबकि फिलहाल उनके मुताबिक कांग्रेस की ओर से हिंदू विरोधी रुख दिखाने का काम किया जा रहा है।
क्या है हल्द्वानी का शुद्धिकरण विवाद?
दरअसल, हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद कथित शुद्धिकरण को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच विवाद जारी है। कांग्रेस इस मामले को लेकर बीजेपी पर लगातार हमलावर है।
इसी सिलसिले में कांग्रेस के एससी विभाग के पूर्व उपाध्यक्ष टीआर रामप्पा की शिकायत पर उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और पार्टी के अन्य सदस्यों के खिलाफ बेंगलुरु में जीरो एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत में महेंद्र भट्ट पर कथित शुद्धिकरण का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है।
मामले को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जहां कांग्रेस इसे दलित सम्मान से जोड़कर सवाल उठा रही है, वहीं बीजेपी नेता इसे राजनीतिक विवाद और तुष्टिकरण की राजनीति बता रहे हैं।
