बुखार उतरने के बाद भी नहीं टला खतरा, अगले 24-48 घंटे हो सकते हैं बेहद अहम

बुखार उतरने के बाद भी नहीं टला खतरा, अगले 24-48 घंटे हो सकते हैं बेहद अहम

Spread the love

नई दिल्ली: डेंगू का बुखार कम होते ही कई लोग मान लेते हैं कि अब मरीज खतरे से बाहर है और तेजी से ठीक हो रहा है। लेकिन डेंगू में बुखार उतरना हमेशा रिकवरी का संकेत नहीं होता। बीमारी के दौरान बुखार कम होने के बाद के अगले 24 से 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसी अवधि में कुछ मरीजों की हालत अचानक बिगड़ सकती है और डेंगू गंभीर रूप ले सकता है।

खासकर बच्चों की देखभाल कर रहे माता-पिता को इस दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। डेंगू आमतौर पर तीन चरणों से गुजरता है और हर चरण में शरीर में अलग-अलग बदलाव हो सकते हैं।

डेंगू का पहला चरण क्या होता है?

डेंगू का शुरुआती चरण फेब्राइल यानी बुखार वाला चरण होता है। यह आमतौर पर संक्रमित मच्छर के काटने के 4 से 10 दिन बाद शुरू हो सकता है और 2 से 7 दिनों तक रह सकता है।

इस दौरान मरीज में अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा चेहरे पर लालिमा, मतली, उल्टी और भूख कम लगना भी डेंगू के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं।

कुछ मरीजों में त्वचा पर रैश या नाक और मसूड़ों से हल्का खून आने की शिकायत भी हो सकती है। इस चरण में मरीज को पर्याप्त तरल पदार्थ देने और उसकी स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।

बुखार उतरते ही क्यों बढ़ जाती है चिंता?

डेंगू का दूसरा चरण क्रिटिकल फेज कहलाता है। यह अक्सर बीमारी के तीसरे से सातवें दिन के बीच आता है। यही वह समय है जब मरीज का बुखार कम या पूरी तरह खत्म हो सकता है।

बुखार उतरने के बाद मरीज और परिवार को लग सकता है कि अब बीमारी ठीक हो रही है, लेकिन अगले 24 से 48 घंटे गंभीर हो सकते हैं। इस दौरान कुछ मरीजों में रक्त वाहिकाओं से प्लाज्मा का रिसाव हो सकता है, प्लेटलेट्स तेजी से कम हो सकते हैं और ब्लड प्रेशर गिरने यानी शॉक का खतरा बढ़ सकता है।

इसलिए तापमान सामान्य होने के बावजूद मरीज की निगरानी बंद नहीं करनी चाहिए।

ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

बुखार कम होने के बाद अगर डेंगू के मरीज में निम्न लक्षण दिखाई दें तो इन्हें चेतावनी के संकेत माना जाना चाहिए:

  • पेट में तेज दर्द या पेट छूने पर ज्यादा दर्द
  • लगातार उल्टी होना
  • 24 घंटे में तीन या उससे ज्यादा बार उल्टी
  • नाक या मसूड़ों से खून आना
  • उल्टी में खून आना
  • काला या तारकोल जैसा मल
  • अत्यधिक कमजोरी या सुस्ती
  • बेचैनी या असामान्य व्यवहार
  • तेजी से सांस लेना या सांस लेने में परेशानी
  • त्वचा का ठंडा, पीला या चिपचिपा होना
  • बहुत ज्यादा प्यास लगना
  • होश बनाए रखने में परेशानी

इनमें से गंभीर लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

किन लोगों में गंभीर डेंगू का खतरा ज्यादा?

कुछ लोगों में डेंगू के गंभीर रूप में बदलने का खतरा अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है। इनमें:

  • 10 साल से कम उम्र के बच्चे
  • 65 साल से अधिक उम्र के लोग
  • डायबिटीज से पीड़ित लोग
  • हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीज
  • लंबे समय से किडनी या लिवर की बीमारी से जूझ रहे लोग
  • पहले डेंगू संक्रमण से गुजर चुके लोग

शामिल हो सकते हैं। खासकर जिन लोगों को पहले डेंगू हो चुका है, उन्हें दोबारा संक्रमण की स्थिति में लक्षणों पर विशेष नजर रखनी चाहिए।

क्रिटिकल फेज के बाद शुरू होती है रिकवरी

अगर क्रिटिकल फेज बिना गंभीर जटिलताओं के गुजर जाता है तो इसके बाद मरीज रिकवरी फेज में प्रवेश कर सकता है। आमतौर पर बीमारी के छठे या सातवें दिन के आसपास सुधार के संकेत दिखाई देने लग सकते हैं।

इस दौरान भूख वापस आने लगती है, कमजोरी और थकान कम हो सकती है और प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ने लगती है। शरीर में जमा अतिरिक्त तरल वापस ब्लड फ्लो में आने लगता है, जिससे मरीज को पहले की तुलना में ज्यादा पेशाब आ सकता है।

कुछ मरीजों में रिकवरी के दौरान लाल और खुजली वाला रैश भी दोबारा दिखाई दे सकता है।

बुखार कम होना मतलब डेंगू खत्म होना नहीं

डेंगू में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सिर्फ बुखार उतरने को पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। खासकर बुखार कम होने के बाद के 24 से 48 घंटे मरीज की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। किसी भी चेतावनी वाले लक्षण के सामने आने पर देरी करने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

संबंधित पोस्ट