ज़िद और जुनून ने बदल दी किस्मत : पुनीता त्रिखा

Punita Trikha

दिल में कुछ कर गुज़रने की तमन्ना हो, धैर्य हो और ख़ुद पर यक़ीन हो तो आप इतिहास लिखते हैं। अपना नाम उस मुक़ाम तक पहुँचा पाने में कामयाब होते हैं जहां से आपको देखकर दूसरे आपसे प्रेरणा लेते हैं और आगे बढ़ने का गुर सीखते हैं। ऐसी ही एक हस्ती का नाम है पुनीता त्रिखा जो बॉलीवुड की जानी-मानी जूलरी डिज़ाइनर हैं और अपने काम से बॉलीवुड के बड़े-बड़े दिग्गजों जैसे सुष्मिता सेन, सलमान खान, कैटरीना कैफ़ को प्रभावित कर चुकी हैं। पेश है उनसे हुई ख़ास मुलाक़ात के अंश :

सवाल : आप जूलरी डिजाइनिंग का काम कब से कर रही हैं? इससे पहले आप एयर होस्टेस भी रह चुकी हैं। उस काम का कितना फायदा मिला?

जवाब : वो साल 2003 था। फ़िल्म थी जानशींन। मेरे जूलरी डिजाइनिंग करियर की शुरूआत इसी फ़िल्म से हुई। मेरे काम को पहली बार लोगों ने देखा और हाथोंहाथ लिया। चूँकि पहले मैं एयरहोस्टेस रह चुकी थी इसलिए मेरे काफ़ी अच्छे लोगों से जान-पहचान हो चुकी थी। उन्हीं लोगों की मदद से मुझे जैकी दादा से मिलने का मौक़ा मिला और फिर जैकी दादा ने ही फ़िरोज़ खान साहब से मिलवाया और मुझे फ़िल्म इंडस्ट्री में मेरा पहला काम मिला। 

सवाल : बॉलीवुड की पहली जूलरी डिजाइनर के रूप में करियर शुरू करने के लिए आपको क्या आकर्षित किया?

जवाब : मैं इंडियन एयरलाइन्स में काम करती थी। पारिवारिक ज़िम्मेदारियों की वजह से  मैंने वो काम छोड़ा और उसी दौरान मेरा बेटा भी हुआ। बेबी होने के बाद फिर लगने लगा कि मुझे वापस कुछ काम करना है। आप जब ग्लैमरस के साथ-साथ चैलेंजिंग जॉब में होते हैं तो आपके लिए घर में बैठना बड़ा मुश्किल होता है। उस वक़्त मुझे लगने लगा कि कुछ ग्लैमरस करना चाहिए। एक दिन मैं लंदन ट्रैवल कर रही थीं तब मेरी मुलाक़ात एक बेहतरीन महिला से हुई। उनको मैंने इंडिया आमंत्रित किया। वो एक अमरेकिन हैं और अभी पेरिस में रहती हैं। जब वो मेरे घर आईं तो उन्होंने मुझे बताया कि वो जूलरी डिजाइनिंग का काम करती हैं और वो जूलरी अपने हाथों से बनाती हैं। मैं बहुत हैरान हुई। मैंने पूछा जूलरी कोई अपने हाथों से कैसे बना सकता है। तो उन्होंने मुझे ऑफ़र किया कि वो मुझे सिखाएँगीं। मैं फिर जूलरी मेकिंग का कोर्स करने उनके पास पेरिस गई और फिर मुझे मेरा नया रास्ता मिल गया।   

सवाल : आप अपनी शैली को अपने पेशे के रूप में कैसे परिभाषित करेंगी?

जवाब : जब मैंने जूलरी डिजाइनिंग का कोर्स किया तो उसके बाद जब भारत आई तो बहुत सारी जूलरी मैंने अपने हाथों से बना ली थीं। तब मेरे पति ने मुझे सपोर्ट करते हुए आइडिया दिया कि आप एक शोरूम खोलिए लेकिन मैंने कहा नहीं आप देखिएगा एक दिन बॉलीवुड में मेरी जूलरी पहनी जाएगी। उस वक़्त वहाँ मेरी एक परिचित महिला बैठीं थीं। वो ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगीं।उसी वक़्त मैंने मन ही मन ठान लिया जब तक मुझे बॉलीवुड में काम नहीं मिलता तब तक मैं अपना शोरूम नहीं खोलूँगी।उस वक़्त मेरे पास क़रीब 250 जूलरी सेट थे जो मैंने हाथों से बनाए थे। और जब जैकी दादा ने एक मौक़ा दिलवाया तो फ़िरोज़ खान साहब मेरे काम पर फ़िदा हो गया। साल 2003 में मुझे बॉलीवुड में काम मिला और साल 2004 में मैंने अपना शोरूम खोला और उसका उद्घाटन जैकी श्रॉफ़ जी ने किया था। 

सवाल : नए-नए सितारों के साथ  काम करना कैसा लगा ?

 जवाब : नए लोगों के साथ काम करना हमेशा अच्छा लगता है। जानशींन फ़िल्म के बाद मैंने सलमान खान के साथ मैंने प्यार क्यू किया और पार्टनर फ़िल्म के लिए जूलरी डिज़ाइन की। ये दोनों ही फ़िल्म उनकी होम प्रोडक्शन फ़िल्म थीं। उसके बाद हॉलीवुड फ़िल्म मैरीगोल्ड के लिए जूलरी बनाई। हर बार नए लोगों के साथ काम करने का अपना मज़ा होता है। आपको बहुत कुछ सीखने को भी मिलता है।

सवाल : भविष्य के लिए आपकी अगली योजना क्या है?

जवाब : भविष्य में मैं अपनी जूलरी एक्सपोर्ट करना चाहती हूँ। मैं चाहती हूँ कि यूरोप के शहरों में जाऊं वहाँ अपने जूलरी के कद्रदान ढूँढूँ और फिर उसे एक्सपोर्ट कर सकूँ। आपको बता दूँ कि मैंने बहुत सारे फ़िल्म स्टार्स के लिए जूलरी डिज़ाइन की है जिसमें श्रीदेवी, रानी मुखर्जी, शिल्पा शेट्टी, अनिल कपूर, फ़रदीन खान, सलीना जेटली, लारा दत्ता, सलमान, जैकी दादा जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं।उनकी तारीफ़ें मुझे हिम्मत देती हैं कि मैं अपने भविष्य की योजनाओं पर ढंग से काम कर सकूँ। 

सवाल : आपकी सफलता के पीछे किसका हाथ है?

जवाब : मैं अपनी इस सफलता के पीछे जैकी दादा का हाथ मानती हूँ। क्योंकि दादा की ही वजह से मैं फ़िरोज़ साहब और सलमान खान से मिल सकी, उनके साथ काम कर सकी। उन्होंने मेरी बहुत मदद की और उन्होंने मुझे अपनी बहन माना जो मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। 

सवाल : जीवन में आपने बहुत उतार-चढ़ाव देखे हैं? युवाओं को क्या मैसेज देना चाहेंगी ?

साल 2004 में मेरे पति को MND मोटोन्यूरॉन नामक बीमारी हो गई। दो साल तक वो वेंटिलेटर पर रहे और 2016 में मेरा साथ छोड़ गए। बहुत संघर्ष किया। घर में ही ICU बना डाला था। अब उनकी मृत्यु को 7 साल होने वाले हैं। इस दौरान क़रीब 9 साल का जो गैप मेरे काम में आया उससे मुझे काफी दिक़्क़त हुई। अब एक बार फिर मैं काम की तलाश में हूँ। बहुत सारे लोगों से मुलाक़ातें हो रही हैं। जल्द ही आपको कुछ अच्छा सुनने को मिलेगा। एक टेलिफ़िल्म को लेकर भी मेरी बातचीत चल रही है। 

सवाल : आपको अपने पेशे में एक रोल मॉडल बनाने का विचार कैसे आया?

जवाब : मैं सारी जूलरी अपने हाथों से बनाती हूँ। मेरे पास एक भी कारीगर नहीं हैं। मैं जूलरी के साथ-साथ शैंडलेज, टेबल डेकोरेशन भी बनाती हूँ। ये सारे काम मैं अपने हाथों से करती हूँ। मुझे कल्पना चावला अवॉर्ड मिला है। जेडी इंस्टिट्यूट ऑफ फ़ैशन टेक्नॉलजी ने मुझे जूलरी डिज़ाइनर ऑफ द ईयर के सम्मान से सम्मानित किया। इसके अलावा टाइम्स ऑफ इंडिया और ढेरों जगहों से जो सम्मान मिला है उसने मेरा हौसला बढ़ाने का काम किया है। मैं सभी की शुक्रगुज़ार हूँ।

सवाल : नई पीढ़ी को क्या संदेश देना चाहेंगी?

जवाब : मैं युवाओं से यही कहना चाहती हूँ कि कभी हार मत मानिए। कहीं कोई एक दरवाज़ा बंद होगा तो दूसरा ज़रूर खुलेगा।हमेशा कोशिश करते रहिए। तब त जब तक आप सफल ना हो जाएँ।

दिग्विजय सिंह द्वारा लिखित ( @thisisdigvijay )

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