नई दिल्ली: बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन इसके साथ कई मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। मानसून के दौरान वायरल इंफेक्शन, फ्लू, टाइफाइड और डेंगू जैसी बीमारियों के मामले तेजी से सामने आते हैं। ऐसे में कई लोग हर बुखार को डेंगू समझ लेते हैं, जबकि ऐसा हमेशा नहीं होता।
विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर सही पहचान और जांच से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।
सामान्य वायरल फीवर के लक्षण
सामान्य वायरल बुखार में आमतौर पर ये लक्षण देखने को मिलते हैं:
- हल्का से मध्यम बुखार
- सर्दी, खांसी या गले में खराश
- शरीर में हल्का दर्द
- कमजोरी और थकान
- 3 से 5 दिनों में धीरे-धीरे आराम मिलना
डेंगू के लक्षण कैसे अलग होते हैं?
डेंगू का बुखार सामान्य वायरल फीवर से अलग हो सकता है। इसके प्रमुख लक्षण हैं:
- अचानक तेज बुखार (102–104°F तक)
- सिरदर्द और आंखों के पीछे तेज दर्द
- मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द
- त्वचा पर लाल चकत्ते
- मतली या उल्टी
- प्लेटलेट्स कम होना
- गंभीर मामलों में नाक या मसूड़ों से खून आना
कब तुरंत डॉक्टर से मिलें?
यदि बुखार 2–3 दिन से अधिक रहे या इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
- लगातार तेज बुखार
- सांस लेने में परेशानी
- बार-बार उल्टी
- शरीर से खून आना
- अत्यधिक कमजोरी या बेहोशी जैसा महसूस होना
डॉक्टर की सलाह के अनुसार डेंगू की जांच कराना जरूरी हो सकता है।
मानसून में कैसे करें बचाव?
- घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
- मच्छरदानी और मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।
- पूरी बाजू के कपड़े पहनें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
- बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें। यदि डेंगू की आशंका हो, तो विशेष रूप से दर्द निवारक दवाएं लेने से पहले चिकित्सकीय सलाह लें।
मानसून में होने वाला हर बुखार डेंगू नहीं होता, लेकिन हर बुखार को हल्के में लेना भी सही नहीं है। यदि बुखार के साथ गंभीर लक्षण दिखाई दें या आराम न मिले, तो डॉक्टर से जांच कराना सबसे सुरक्षित कदम है। समय पर पहचान और सही इलाज से डेंगू समेत कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।
